राजमोहन गांधी की नई किताब में हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए ‘कल्याणकारी’ मार्ग का सुझाव
हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब में राजमोहन गांधी ने हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक ‘कल्याणकारी’ मार्ग प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि हिंदू धर्म अब केवल भारत की...
हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब में राजमोहन गांधी ने हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक ‘कल्याणकारी’ मार्ग प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि हिंदू धर्म अब केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वभर में फैला हुआ है। दुनिया के अनेक हिस्सों में हिंदू धर्म के अनुयायी मौजूद हैं, भले ही वे भारतीय नस्ल के न हों।
गांधी का मानना है कि निकट भविष्य में, विश्व के अधिकांश भारतीय संभवतः हिंदू ही रहेंगे, और अधिकांश हिंदू भी भारतीय होंगे। हालांकि, इसका अर्थ यह भी है कि बहुत से भारतीय ऐसे हैं जो हिंदू नहीं हैं और संभवतः कई गैर-भारतीय भी हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि हिंदू धर्म का विस्तार वैश्विक स्तर पर हो रहा है।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है: क्या हिंदू मूल्यों को दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी? क्या ये मूल्य हिंदू नस्ल से अलग होकर मानवता के लिए खुले रूप में प्रस्तुत होंगे? विशेष रूप से यह जानना जरूरी है कि क्या हिंदू भारतीयों के गैर-भारतीय जीवनसाथी या साथी हिंदू मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। यह एक ऐसा प्रश्न है जो न केवल हिंदू धर्म का भविष्य निर्धारित कर सकता है, बल्कि इससे जुड़ी सामाजिक धारणा पर भी असर डाल सकता है।
गांधी ने यह भी उल्लेख किया कि दुनिया भर के लोग और समाज हिंदू संस्कृति और उसके अनुयायियों पर नजर रख रहे हैं। क्या यह बढ़ता हुआ हिंदू समुदाय दुनिया को आशा, खुशी या चिंता दे रहा है? इसका उत्तर कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि हिंदू धर्म का आचार-व्यवहार और उसका सामाजिक योगदान।
उनकी किताब एक गहन विचार का संचार करती है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि हिंदू धर्म को केवल एक धार्मिक पहचान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक ऐसे मूल्य प्रणाली के रूप में भी मान्यता दी जानी चाहिए, जो समस्त मानवता के लिए उपलब्ध है। राजमोहन गांधी की यह नई पहल हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरह से अपनी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं।
स्रोत: scroll.in
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