भवनिपुर में मुस्लिम मतदाताओं की 40% हानि, चुनावी सूची में अनियमितताओं का खुलासा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के भवनिपुर विधानसभा क्षेत्र में विशेष चुनावी सूची की समीक्षा के दौरान 40% से अधिक मतदाता जिनके नाम हटाए गए, वो मुस्लिम समुदाय से थे। जबकि इस क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की आबादी...
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के भवनिपुर विधानसभा क्षेत्र में विशेष चुनावी सूची की समीक्षा के दौरान 40% से अधिक मतदाता जिनके नाम हटाए गए, वो मुस्लिम समुदाय से थे। जबकि इस क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 20% है। यह खुलासा एक कोलकाता स्थित अनुसंधान संगठन द्वारा बुधवार को किया गया।
भवनिपुर क्षेत्र की विधायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार भी अपनी सीट के लिए चुनावी मैदान में हैं। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के विधायक और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से होगा। अनुसंधान संस्थान ‘सबर इंस्टीट्यूट’ ने बताया कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट के रूप में पाया गया, उनमें मुस्लिमों की संख्या 22.7% थी, जो इस समुदाय की जनसंख्या के अनुसार थी।
हालांकि, विशेष समीक्षा के बाद जारी की गई अतिरिक्त सूची में हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिमों की संख्या 40.1% तक पहुंच गई। ‘सबर इंस्टीट्यूट’ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बताया कि ये हटाने की प्रक्रिया मामूली वर्तनी की गलतियों या ‘बहुत अधिक भाई-बहनों’ जैसे मनमाने मानदंडों के कारण होती है।
चुनाव आयोग ने हाल ही में विशेष जनगणना के बाद अपने प्रारंभिक ‘अंतिम’ मतदाता सूची का प्रकाशन किया था। इसके अंतर्गत भवनिपुर क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं का बड़े पैमाने पर नाम हटाना कई सवालों को जन्म देता है। यह स्थिति विशेषकर उन समुदायों के लिए चिंता का विषय है, जो चुनाव प्रक्रिया में अपनी भागीदारी को लेकर सतर्क रहते हैं।
विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी विशेष समुदाय के मतदाता disproportionately प्रभावित हो रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। यह भी देखा जाना चाहिए कि चुनावी प्रक्रिया में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जाए ताकि सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
स्रोत: scroll.in
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